नरक चतुर्दसी 


 
आज है  नरक चतुर्दसी , इसे छोटी दीवाली भी कहा जाता है.  आज के दिन मृत्यु के देवता यमराज की उपासना की जाती है . इस दिन भगवान कृष्ण की उपासना भी की जाती है क्योंकि इसी दिन उन्होंने नरकासुर का वध किया था. कहीं कहीं पर ये भी माना जाता है की आज के दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था. जीवन में आयु या स्वास्थ्य की अगर समस्या हो तो इस दिन के प्रयोगों से दूर हो जाती है. 


नरक चतुर्दशी का महत्व
 
आज के दिन  खास तौर पर लोग यम देवता की पूजा कर घर के मुख्य द्वार के बाहर तेल का दीपक जलाते हैं। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु कभी नहीं आती। इस दिन सुबह सूर्योदय से शरीर पर सरसों का तेल लगाकर स्नान करने का विशेष महत्व है। स्नान के बाद भगवान हरि यानी विष्णु मंदिर या कृष्ण मंदिर जाकर दर्शन करने चाहिए। ऐसा करने से पाप से मुक्ति मिलती है और सौन्दर्य बढ़ता है। छोटी दिवाली को यम चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी या रूप चौदस भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्राद्ध महीने में आए हुए पितर इसी दिन चंद्रलोक वापस जाते हैं। इस दिन अमावस्या होने के कारण चांद नहीं निकलता जिससे पितर भटक सकते हैं इसलिए उनकी सुविधा के लिए नरक चतुर्दशी के दिन एक बड़ा दीपक जलाया जाता है। यमराज और पितर देवता अमावस्या तिथि के स्वामी माने जाते हैं।

इस दिन का सम्बन्ध स्नान और सौंदर्य से किस प्रकार है?

 इस दिन प्रातःकाल या सायंकाल चन्द्रमा की रौशनी में जल से स्नान करना चाहिए, | इस दिन विशेष चीज़ का उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए ' जल गर्म न हो ताजा या शीतल जल होना चाहिए , ऐसा करने से न केवल अद्भुत सौन्दर्य और रूप की प्राप्ति होती है, बल्कि स्वास्थ्य की तमाम समस्याएँ भी दूर होती हैं
इस दिन स्नान करने के बाद दीपदान भी अवश्य करना चाहिए , नरक चतुर्दशी पर दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए किस प्रकार दीपक जलाएं?
नरक चतुर्दशी पर मुख्य दीपक लम्बी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए जलता है, इसको यमदेवता के लिए दीपदान कहते हैं। 
 घर के मुख्य द्वार के बाएं ओर अनाज की ढेरी रखें, इस पर सरसों के तेल का एक मुखी दीपक जलाएं, दीपक का मुख दक्षिण दिशा ओर होना चाहिए। 


नरक चतुर्दसी की पौराणिक  कथा

 एक प्रतापी राजा थे। जिनका नाम रन्ति देव था।वे  बड़े न्याय प्रिय और बहुत कृपालु थे।   उन्होंने कभी किसी तरह का पाप नहीं किया था। उनकी आत्मा और उनका दिल एक दम साफ और शुद्ध था। जब उनकी मौत का समय आया तो उन्हें पता चला कि उन्हें नरक में जगह दी गई है। राजा ने जब इसका कारण पूछा तो यम ने कहा कि आपके द्वारा एक बार एक ब्राह्मण भूखा सो गया था। 
इस पर राजा ने यम से कुछ समय मांगा। यम ने राजा को थोड़ा समय दिया और अपने गुरू से राय लेकर राजा ने हजार ब्राह्मणों को खाना खिलाया। इस प्रक्रिया से सभी ब्राह्मण खुश हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया। इसी के प्रकोप से राजा को मोक्ष की प्राप्ति हुई। बताया जाता है कि भोजन कराने का ये दिन कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चौदस का दिन था। तभी से आज तक नरक निवारण चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। 
 
आप सभी को दीवाली की हार्दिक शुभकामनायें ,